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सुप्रीम कॉमेडियन विकलांगों के लिए हर महीने दो शो करते हैं

दिव्यांगों पर मजाक बर्दाश्त नहीं, केंद्र बनाए सख्त कानून

सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के सम्मान की रक्षा के लिए सख्त कानूनों की आवश्यकता पर बल दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से ऐसा कानून बनाने को कहा है जो दिव्यांगजनों का मज़ाक उड़ाने या उन पर अपमानजनक टिप्पणी करने को अपराध बनाए। ठीक उसी तरह जैसे एससी/एसटी एक्ट के तहत जाति-आधारित टिप्पणी करना अपराध माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अगर किसी को अपमानजनक कहा जाता है, तो…यह मामला स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए) नामक एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए काम करने वाले एसएमए क्योर फाउंडेशन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा। अदालत ने हास्य कलाकारों को हर महीने दो शो आयोजित करने का निर्देश दिया था, जिसमें वे विकलांग लोगों की सफलता की कहानियाँ सुनाएँ।

यदि दण्ड दिया जा सकता है तो विकलांगों के मामले में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए।

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